शैडोइंग अभ्यास: Z| Jolly Phonics group 5| Reading words with z sound for kids| with pictures| Z sound with action. - वीडियो के साथ अंग्रेजी बोलना सीखें

पाठ बनाया जा रहा है...
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Z, Z, I, P, zip.
2
Z, A, P, zap.
3
B, A, Z, buzz.
4
B, A, Z, buzz.
5
F, I, Z, fizz.
6
F, I, Z, fizz.
7
Z, E, G, Z, A, G, Zigzag.
8
Z, E, G, Z, A, G, Zigzag.

इस पाठ के बारे में

इस पाठ में, बच्चे 'z' ध्वनि वाले शब्दों के साथ पढ़ाई करेंगे। 'z' ध्वनि के साथ शब्दों को पहचानना और उनका उच्चारण करना सीखना 'अंग्रेजी शैडोइंग' के लिए महत्वपूर्ण है। यह पाठ समर्पित है छोटे बच्चों के लिए, जो मजेदार चित्रों और क्रियाओं के साथ शब्दों का अभ्यास करेंगे। बच्चों को 'z' ध्वनि को सही ढंग से बोलने में मदद करने के लिए, हम कुछ सरल और आसान शब्दों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इस अभ्यास में, बच्चे न केवल सुनेंगे बल्कि बोले हुए शब्दों का अनुकरण भी करेंगे, जिससे उनके बोलने की क्षमता में सुधार होगा।

मुख्य शब्दावली और वाक्यांश

  • ज़िप (zip)
  • ज़ैप (zap)
  • बज़ (buzz)
  • फिज़ (fizz)
  • ज़िगज़ैग (zigzag)

अभ्यास टिप्स

इस वीडियो के मंथन के लिए, बच्चों को shadowspeak तकनीक का उपयोग करना चाहिए। इसका अर्थ है कि बच्चों को पहले शब्दों को सुनना है और फिर उन्हें दोहराना है। उच्चारण की गति को ध्यान में रखते हुए, बच्चों को ध्यानपूर्वक सुनना और अनुकरण करना आवश्यक है। वीडियो की ध्वनि के समान तेजी से बोलते हुए, वे अपनी अंगुलियों, हाथों या शरीर के अन्य हिस्सों से क्रियाएँ कर सकते हैं जैसे कि 'ज़िप' करते समय ज़िपर को खींचना या 'बज़' करते समय मधुमक्खी की गति की नकल करना। ये क्रियाएँ बच्चे को शब्दों की ध्वनि को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगी।

सुनने और दोहराने के साथ, बच्चे अपनी अंग्रेजी शैडोइंग कौशल को बेहतर बनाने में सहायक होंगे। जब बच्चे क्रमबद्ध ढंग से चलते हैं, तो उन्हें उच्चारण और शब्दों के तुतलाने में सुधार होगा। उन्हें वीडियो के साथ-साथ बोलने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि उनकी shadow speech में विविधता आ सके।

शैडोइंग तकनीक क्या है?

शैडोइंग (Shadowing) एक विज्ञान-समर्थित भाषा सीखने की तकनीक है जो मूल रूप से पेशेवर दुभाषिया प्रशिक्षण के लिए विकसित की गई थी। विधि सरल लेकिन शक्तिशाली है: आप मूल अंग्रेज़ी ऑडियो सुनते हैं और तुरंत इसे ज़ोर से दोहराते हैं — जैसे वक्ता की छाया 1-2 सेकंड की देरी से। शोध से पता चलता है कि यह उच्चारण सटीकता, स्वर, लय, जुड़ी हुई ध्वनियाँ, सुनने की समझ और बोलने की प्रवाहशीलता में काफ़ी सुधार करता है।