Unit 11: Alveolar Consonants
वर्त्स्य स्पर्श: जीभ की नोक ऊपरी दाँतों के पीछे उभरी जगह पर।
पाठ
यूनिट 11: वर्त्स्य स्पर्श /t/ और /d/
यह यूनिट दो वर्त्स्य स्पर्श व्यंजनों (alveolar stops) पर केंद्रित है: /t/ और /d/। दोनों ध्वनियों का उच्चारण-स्थान एक है — alveolar ridge, यानी ऊपरी अगले दाँतों के ठीक पीछे का वह छोटा उबड़-खाबड़ उभार।
इन्हें कैसे बनाएँ:
- जीभ की नोक को alveolar ridge पर मज़बूती से टिकाइए।
- हवा को पूरी तरह रोकिए, फिर एक छोटे झटके में छोड़ दीजिए।
- /t/ के लिए: अघोष और ज़ोर वाले अक्षरों की शुरुआत में महाप्राण (छोड़ने के बाद हवा का झोंका, जैसे time, take में)।
- /d/ के लिए: घोष — बंद के दौरान आपकी स्वरतंत्री कंपती है।
सीखने वालों के लिए मुख्य बातें:
- अमेरिकी अंग्रेज़ी में स्वरों के बीच /t/ अक्सर flap /ɾ/ बन जाता है (जैसे water, better, city)।
- अंतिम /t/ और /d/ को साफ़ छोड़ना ज़रूरी है — उन्हें गिराइए मत (cat, bed)।
- इन वर्त्स्य स्पर्शों की जगह दंत्य ध्वनि (जीभ दाँतों के बीच) मत लगाइए।
- हिंदी में दंत्य त/द और मूर्धन्य ट/ड अलग-अलग हैं; अंग्रेज़ी /t/ और /d/ इन दोनों के बीच की जगह पर बनते हैं — जीभ की नोक न दाँतों पर, न मुँह की छत की ओर उल्टी मुड़ी हुई, बल्कि दाँतों के ठीक पीछे उभार पर।